बहुत दिन बाद…



बहुत दिन बाद शायद हम मुस्कुराये होंगे,
वो भी अपने हुस्न पर खूब इतराये होंगे।

संभलते-संभलते अब तक ना संभले हम,
सोचो किस तरह उनसे हम टकराये होंगे।

महक कोई आई है आँगन में कहीं से उड़कर
शायद उन्होंने गेसू अपने हवा में लहराये होंगे।

पीछे से तपाक से भर लिया बाँहों में उन्हें,
वस्ल के वक्त वो बहुत घबराये होंगे।


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