मगर अब नहीं…



कभी मैं भी तेरी मोहब्बत के नशे में था,
मेरी आँख में भी खुमार था, मगर अब नहीं,
कभी ये दिल बाग़-ओ-बहार था, मगर अब नहीं,
तेरा ज़िक्र वजह-ए-करार था, मगर अब नहीं।

मगर अब नहीं शायरी


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