ग़म-ए-दुनिया…



ग़म-ए-दुनिया में ग़म-ए-यार भी शामिल कर लो,
नशा बढ़ता है शराबें जो शराबों में मिलें,
अब न वो मैं हूँ, न तू है, न वो माज़ी है फ़राज़,
जैसे दो साए तमन्ना के सराबों में मिलें।


, , ,