Ab Hamen Tata Ka Tohfa Khushnuma Mil Jayega



अब हमें टाटा का तोहफा, खुशनुमा मिल जाएगा
इक रतन, ख्वाबे-रतन का, दिलरुबा मिल जाएगा

हर जवाँ, बच्चे व बूढ़े, मर्द या खातून(स्त्री) को
सैर की खातिर खिलौना, अब बड़ा मिल जाएगा

पांच फुट चौड़ी है ये, लम्बाई ग्यारह के करीब
टैंक, पंद्रह लिटर का इसमें लगा मिल जाएगा

खिड़कियाँ हैं, कुर्सियां भी, छत भी है, थोड़ी ज़मीं
लाख में, ये भागने वाला किला मिल जाएगा

चिलचिलाती धूप हो, या सर्दियों की सुबहो-शाम
शुक्रिया, टाटा हमें, साधन नया मिल जाएगा

चार पहिया थे, पर अब नहीं रह जायेंगे
था किसे मालूम ऐसा, रहनुमा मिल जाएगा

हर बड़ी मोटर का मालिक, रश्क़(द्वेष) से देखेगा जब
भीड़ में नेनो को पहले, रास्ता मिल जायेगा

कौन जाने, किस गली में, कब कहाँ मुड़ जाए ये
फिर किसी को क्या खबर, किसको पता मिल जायेगा

तोड़कर सिग्नल जो आया, क्या उसे देखा ‘रक़ीब’
लालबत्ती का सिपाही, पूछता मिल जायेगा

By Satish Shukla “Raqeeb”


, , , , , , , ,